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नवागढ़ में त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न प्राकृत भाषा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

नवागढ़ (ललितपुर)। परम पूज्य प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ में आयोजित त्रिदिवसीय प्राकृत प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन हुआ।
इस कार्यशाला में देशभर से आए 100 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृत भाषा के शिक्षण हेतु प्रशिक्षित किया गया। बुंदेलखंड जैसे दूरस्थ क्षेत्र में इस स्तर के आयोजन की सभी विद्वानों एवं प्रतिभागियों ने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राकृत भाषा में प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं टीकमगढ़ विधायक यादवेंद्र बुंदेला ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति एवं प्राचीन भाषाओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल है।
कार्यशाला के निर्देशक ब्र. जय कुमार निशांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ भावी शिक्षकों के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।
कार्यशाला के दौरान प्रतिदिन अभिषेक पूजन, आध्यात्मिक साधना एवं पुरातात्विक स्थलों के भ्रमण ने प्रतिभागियों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध अनुभव प्रदान किया। विशेषज्ञों ने आशा व्यक्त की कि इस आयोजन से प्राकृत शिक्षकों की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।
विद्वानों ने दिया प्रशिक्षण : प्रशिक्षण कार्य में ब्र. जयकुमार जैन निशांत , विनोद जैन (रजवास), राजकुमार जैन शास्त्री (सागर), डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़), डॉ. शैलेश जैन (उदयपुर), डॉ. सुनील जैन संचय (ललितपुर), डॉ. आशीष जैन शास्त्री (दमोह), डॉ. आशीष जैन (बम्होरी), डॉ. राजेश जैन (ललितपुर), डॉ. निर्मल जैन शास्त्री एवं पवन जैन शास्त्री दीवान (सागर) ने प्रशिक्षण प्रदान किया। आयोजन समिति की ओर से सभी को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला प्रभारी डॉ. शैलेश जैन (उदयपुर) ने प्रभावी रूप से किया।
फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. ऋषभ चंद जैन, महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य सहित सभी पदाधिकारियों ने नवागढ़ क्षेत्र कमेटी एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की सफलता में ब्रह्मचारी जयनिशांत भैया जी की सहृदयता एवं क्षेत्र के महामंत्री वीरचंद जैन नेकोरा के उत्कृष्ट नेतृत्व की विशेष भूमिका रही।
यह कार्यशाला एक सफल “ज्ञान-यज्ञ” के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी।
उल्लेखनीय है कि प्राकृत भाषा प्राचीन भारत की जनभाषा थी। भारत सरकार ने इस भाषा की महत्ता देखते हुए इसे शास्त्रीय भाषा में शामिल किया है।

▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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