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*मोक्ष कल्याणक के साथ लार पंच कल्याणक महोत्सव का समापन* उमड़ा विशाल जनसैलाब

लार (टीकमगढ़) – श्री दिगंबर जैन समाज समिति लार के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव का गुरुवार को समापन हो गया। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रदापूर्व मनाया गया। समापन के साथ तीर्थकर भगवान की प्रतिमाओं को दिगंबर जैन मन्दिर नव निर्मित मनास्तम्भ में विराजमान किया गया। चर्या शिरोमणि अध्यात्मिक संत पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज् के सानिध्य में आदिनाथ भगवान का अभिषेक,रिद्धि सिद्धि मंत्रो से विश्व शांति के लिए महाशांतिधारा, नित्य नियम पूजन,दस भक्ति पाठ, मोक्ष गमन, निर्वाण कल्याणक की पूजा हुई। साथ ही विश्व शांति महायज्ञ में आहुति दी गईं। आचार्य के सानिध्य में भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत पर निर्वाण प्राप्ति, अग्नि कुमार देवों द्वारा अग्नि प्रज्ज्वलित कर नख व केश विसर्जन की क्रियाएं संपन्न की गईं। महोत्सव में सौधर्म इन्द्र मनीष जैन,चक्रेश जैन उज्जैन,यज्ञनायक संयम जैन आकाश जैन, ईशान इंद्र डॉ.अरविन्द्र जैन सानत इंद्र खुशाल चन्द्र जैन, महेंद्र इंद्र नितिन जैन उपस्थित रहे। संगीतकार रामकुमार दोराहा ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हुकुम,ज्ञान चंद्र,जिनेश,आशीष चौधरी के परिवार को प्राप्त हुआ।आचार्य श्री ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है वह पर के जीवन की कीमत समझो। मानव जीवन की प्राप्ति कठिन ही नहीं अत्यंत दुर्लभ है। 84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव जीवन है। यह खेल कूद से प्राप्त नहीं हुई। जब जीव महा साधना करता है तब मानव देह्, सुकुल सुलक्षण सु बुद्धि विवेकशीलता श्रेष्ठ संगीत की प्राप्ति साधु स्वभाव प्राणी मात्र के प्रति वात्सल्य भाव,देश,राष्ट,धर्म,समाज के प्रति भक्ति भाव राष्ट्रवासियों के प्रति साम्य भावकों प्राप्त करता है। साथ ही ऊंच नीच भाव तथा भाषाओं में राग द्वेष भाव के अभाव को प्राप्त करता है।राग द्वेष भाव का करो आभाव,परस्पर गांव,नगर,जंगल,वन,पर्वत,तीर्थ क्षेत्रो,मे भी मैत्री भाव रखो,क्लेश भाव नही। इसके बाद भक्ति भाव से आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थांकर भगवान की प्रतिमाओं को रथ, पालकी और सिर पर विराजमान करके श्रद्धालु रथयात्रा के साथ दिगंबर जैन मन्दिर पहुंचे। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य और पं.बा.ब्र. जयकुमार निशान्त,बा.ब्र.संजय जैन गुणाधीश अहार, और पंडित मनीष जैन के निर्देशन में मंत्रोच्चार के मध्य जिनेंद्र भगवान की जिन प्रतिमाओं को चैत्य वृक्ष पर विराजमान किया गया। दोपहर मे आयोजन स्थल अयोध्या नगरी से गजरथ शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें प्रभु के तीन रथ,घोड़ा,बग्गी राजस्थान का दिव्य घोष एवं पारस म्यूजिकल गुरुप का दिव्य घोष मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। मार्ग पर केसरिया धर्म ध्वजाएं विश्व शांति और बंधुत्व का संदेश दे रही थीं। विभिन्न युवा मंडल ‘जय अरिहंत’ और ‘जय जिनेंद्र’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। भव्य रथ यात्रा निकली गई जिसमे विशाल जनसैलाब उमड़ा इन्द्र इंदानी के साथ श्रद्धलु नित्य कर रहे थे।सात परिक्रमा के साथ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव सम्पन्न हुआ।रात्रि महा आरती नव दीक्षारतीयो की गोदभराई की गई एवं उदयपुर से आये जैन जादूगर द्वारा एक से बढ़कर एक जादू प्रस्तुत किये गये।


▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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