अक्षय तृतीया पर आदिनाथ पूजन कर जैन धर्मालुओं ने मनाया महापर्व

ललितपुर। जैन धर्मालुओं ने आज अक्षय तृतीया को दान का पर्व मनाते हुए जैन मंदिरों में प्रातःकाल अभिषेक पूजन के उपरान्त भगवान आदिनाथ की पूजन कर अर्घ समर्पित किए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा ऋषभदेव ने मुनिदीक्षा धारण के उपरान्त छह माह का उपवास लेकर आहारचर्या के लिए निकले उस समय नवदाभक्ति पूर्वक आहार की विधि न मिलने के कारण पडगाहन नहीं हो पाया 7 माह 9 दिन के उपरान्त अक्षय तृतीया को हस्तिनापुर नगरी में मुनिराज का प्रथम आहार राजा श्रेयांस के यहां हुआ और आहार में मात्र इच्छुरस का आहार गृहण किया। तब से आज तक अक्षयतृतीया को जैन धर्मालु आखा तीज के रूप में मनाते हैं और दानतीर्थ के प्रवर्तक राजा श्रयांस कहलाए।
नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पाठशाला परिवार के बच्चों ने अक्षय तृतीया पर भारतीय भेषभूषा में पूजन सम्पन्न कराई और स्वल्पाहार में इच्छरस बच्चों को वितरित कर मंदिर प्रबंधक जिनेन्द्र जैन रजपुरा एवं मनीष जैन फोटो द्वारा पुरूष्कृत किया। कार्यक्रम की संयोजना प्रीति जैन, गुंजा जैन, दीपा जैन, श्यामली जैन, महक जैन, टीसा जैन द्वारा की गई।

इस मौके पर प्रमुख रूप से मनोज जैन जडीबूटी, संतोष जैन, विमल जैन पारौल, अनिल जैन अलया, अनुराग जैन सिंघई, मनोज जैन कलपुर्जे, राजकुमार जैन, विकास खजुरिया, सुरेन्द्र जैन कुडावनी, विमल जैन डुगारसा, ऋषभ जैन रजपुरा सतीश जैन मौजूद रहे। अक्षय तृतीया पर अनेकों श्रावकों ने निकटवर्ती टीकमगढ़ जिले में विराजमान चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज, मप्र के भानगढ में विराजमान तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमणमुनि सुधासागर महाराज एवं चंदेरी नगर में निर्यापक मुनि अभयसागर महाराज सहित साधुसंघों में पहुंचकर दर्शन लाभ लिया और आहारदान किया। अनेकों श्रावकों ने अपने आवास पर परोक्ष रूप से दिगम्बर साधुओं का नमोस्तु नमोस्तु की भावना से पडगाहन कर भावना की कि उनके घर ऋद्धिधारी मुनिराज का पदार्पण हुआ और उन्हें आहारदान कर पुर्याजन मिला।

▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️ संपादक टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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