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*गेटेम्बे फाउंडेशन की मिशन बेटियाँ की पहल की ऐतिहासिक जीत* *अब बिना पक्ष सुने नहीं होगी शिक्षकों पर कोई कार्यवाही*

*ऑनलाइन छुट्टी व्यवस्था और मेडिकल कॉलेज पहल पहले ही दिलवा चुकी है बड़ी सफलताएँ*

ललितपुर/उत्तर प्रदेश

प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहतभरी बड़ी खबर सामने आई है। लगातार समय से विभिन्न जिलों में शिक्षकों की समस्याओं को उठाने वाली संस्था गेटेम्बे फाउंडेशन (ग्लोबल एमपावरमेंट टीम मिशन बेटियां) की मिशन बेटियां द्वारा पहल पर शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी पर उनका पक्ष सुने बिना कोई भी प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होगी।
यह आदेश प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए न्याय और सुरक्षा की दिशा में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रही संस्था पिछले काफ़ी समय से अलग–अलग जिलों में शिक्षकों की समस्याओं को सुनकर दस्तावेज़ आधारित रिपोर्ट तैयार करती रही है। अनुचित कार्यवाहियों और पक्ष न सुने जाने की शिकायतें सामने आने पर संस्था ने इसे शासन स्तर पर उठाया।
उनकी इस गंभीर पहल के बाद विभाग को यह निर्णय लेना पड़ा।

संस्था का सिद्धांत हमेशा रहा है—
“हम बोलते नहीं, करके दिखाते हैं।”

संस्था के संस्थापक डॉ. विकास गुप्ता “जीत”ने बताया की संस्था के द्वारा पहले भी शिक्षक समाज के लिए कार्य किये गए हैं जिससे

*ऑनलाइन छुट्टी व्यवस्था हुई और शिक्षकों के संघर्ष का अंत*

शिक्षकों को सबसे अधिक राहत देने वाला कदम रहा उत्तर प्रदेश के समस्त जिले में अवकाश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करना।

पहले छुट्टी मनमाने ढंग से रोकी जाती थी, फ़ाइलों में देरी होती थी,
और कई शिक्षकों ने भ्रष्टाचार और अनुचित दबाव की शिकायतें की थीं।

GETEMBE FOUNDATION ने इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन और शासन तक भेजी।
संस्था की लगातार सक्रियता के बाद पूरे जिले में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू की गई।
इसके परिणामस्वरूप परिणाम
छुट्टी के लिए न दौड़भाग, न सिफारिश पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
रिकॉर्ड डिजिटल, बदलने की कोई गुंजाइश नहीं भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर सीधा प्रहार हुआ जिससे शिक्षकों में सुरक्षा और सम्मान का भाव जाग्रत हुआ
कई शिक्षकों ने इसे “सबसे बड़ा सुधार” बताया।
उन्होंने बताया की जनपद मे
*मेडिकल कॉलेज निर्माण की पहल: दूरदर्शिता का उदाहरण बना*
जनपद में मेडिकल कॉलेज की माँग वर्षों से थी, पर किसी ने पहल नहीं की। गेटेम्बे फाउंडेशन की मिशन बेटियाँ कार्यक्रम ने सबसे पहले औपचारिक रूप से यह माँग शासन तक पहुँचाई।
संस्था की रिपोर्ट से प्रभावित होकर
माननीय मुख्यमंत्री जी ने तत्काल अग्रिम कार्यवाही के आदेश जारी किए। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बल्कि जिले के विकास में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. जीत ने बताया की शिक्षकों एवं आमजन में बढ़ा संस्था पर विश्वास निरन्तर बढ़ता ही जा रहा हैं

नए आदेश के बादपूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाअध्यक्ष मो. मुनीर का कहना है “पहली बार किसी संस्था ने हमारी बातों को सही तरीके से ऊपर तक पहुँचाया है।” एवं शिक्षक समाज के साथ सदैव रहने का काम किया हैं गेटेम्बे फाउंडेशन की मिशन बेटियां की विशेषता है की यह बिना विवाद, बिना शोर, बिना राजनीति के केवल सकारात्मक और प्रमाणित कार्यवाही। इसी कारण अब शिक्षक खुलकर कहने लगे हैं कि—
“यदि हम एकजुट होकर गेटेम्बे फाउंडेशन के मिशन बेटियाँ कार्यक्रम के साथ खड़े हों तो कोई भी अन्याय नहीं टिक सकता।
डॉ. जीत गुप्ता ने कहा की अब टीम मिशन बेटियाँ शिक्षकों की पहली पसंद बन रही हैं क्योंकि समस्याओं का वास्तविक समाधान, पारदर्शी कार्यशैली, प्रशासनिक व कानूनी समझ, भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक रुख, हर शिक्षक को सुरक्षा का भरोसा, सेवा–समर्पण पर आधारित संगठन उन्होंने कहा संस्था का स्पष्ट संदेश— “शिक्षक सम्मानित होंगे तो शिक्षा मजबूत होगी।”

गेटेम्बे फाउंडेशन की मिशन बेटियाँ कार्यक्रम बदलाव की नई पहचान हैं

ऑनलाइन अवकाश व्यवस्था, मेडिकल कॉलेज की पहल और अब शिक्षकों की सुनवाई से संबंधित आदेश ये सब इस बात का प्रमाण हैं कि संस्था सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि परिणाम लाती है।
आज प्रदेश भर के जिले के कई शिक्षक यह सोच रहे हैं कि—
ऐसे संगठन के साथ जुड़ना न केवल आवश्यक है बल्कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए अनिवार्य भी।

पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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