जयन्ती विशेष / डॉ राममनोहर लोहिया परतंत्र और स्वतंत्र भारत में सत्याग्रह आन्दोलन के लौहपुरुष डॉ राममनोहर लोहिया के विचार आज भी प्रासंगिक हैं

ललितपुर । डॉ राममनोहर लोहिया जी की जयंती पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए नेहरू महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि महान समाजवादी प्रखर नेता डॉ राममनोहर लोहिया स्वतंत्र भारत में राजनीति के एक बागी राजकुमार की तरह सड़क से संसद तक अविराम संघर्ष चलाते रहे । उनका मानना था कि औसतन ऐसी सम्भव बराबरी तो होना ही चाहिए कि जिसमें एक से लेकर अधिकतम दस से ज्यादा की गैरबराबरी न हो । उनका देशप्रेम एक विश्व और उसकी एक सरकार के स्थापनार्थ परम सहायक था ।
आजाद भारत में उन्होंने पुर्तगाली उपनिवेश गोवा को मुक्त कराने में अगुवाई की और बहादुरी के साथ विजय प्राप्त की ।
डॉ लोहिया का कहना था कि मार्क्सवादी दर्शन व्यक्तिगत सम्पत्ति के अधिकार को समाप्त करने का पक्षधर है । परन्तु समाजवाद के वस्त्र में गाँधीजी के विचार और कार्य यदि बाँधें जा सकें तो निश्चय ही दुनिया में मानवता की शान्ति और सुखद जीवन का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है ।
पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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