
राम नवमी पर बिशेष,
सौभाग्य रवि फिर उदित हुआ..
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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कौशल्या नंदन,नृप दशरथ सुत, अवध के राजकुमार,
चले संग ऋषि विश्वामित्र के,
धर्म, कर्म रक्षार्थ.
जनक नंदनी वरण किया,
मिथला,अवध,हर्षाये,
अयोध्या में जन-जन हर्षित,
माँ सीता वे पाये.
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माँ की करनी, वन वन भटके, राजपाट को त्यागा,
कोमलांगी माँ सीता ने भी,
पति का पथ अपनाया.
चौदह वर्ष, अवध था रोया,
चित्रकूट मुस्काया,
वन, अटवी लंका की रज ने,
प्रभु चरणों को पाया.
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लौटे बने नरेश अयोध्या,
जन-जन थे हर्षाये,
फिर माँ सीता,भटकी वन- वन,अति दुःख, वेदना पाये.
लव, क़ुश जैसे पुत्र प्रतापी,
अवध पुरी ने पाये,
मोह, नेह के तोड़ के बंधन,
माँ सीता व्रत अपनाये.
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हर स्थिति में रहे सहज़ ही,
कर्तव्य ही धर्म माना,
मन के आँसू और वेदना,
को जग ने न जाना.
राष्ट्र अधिपति,प्रजा सुखी सब, हर जन मन मुस्काये,
राम राज्य में रह वसुधा पर,
स्वर्ग सुखों को पाये.
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मोक्ष पथिक थे,सिद्ध बने प्रभु,जड़,चेतन हर्षाये,
विश्व वंदय श्री राम प्रभु के,
गुण जग, जन ने गाये.
कलयुग में थे बंदी गृह में,
न पूजा, न अर्चन,
नयन नीर था कोटि जनों के,
घनी पीर थी, हर मन.
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सौभाग्य रवि फिर उदित हुआ,अयोध्या ने गौरव पाया
सरयू तट पर प्रभु राम का,
मंदिर अद्भुत आया.
विश्व मुदित है प्यारी छवि लख, जन मन हर्ष समाया,
‘जय श्री राम’ दिव्य घोष से,
धरा-गगन मुस्काया.
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राम नवमी पुण्य दिवस पर,
करते हैं शत वंदन,
श्रेष्ठ करें व श्रेष्ठ बनें अब,
इस वसुधा के सब जन.
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संपर्क//अमृता हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद, हरियाणा,
मो:7999469175
पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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