नवागढ़ में प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण की कार्यशाला सम्पन्न द्वि-दिवसीय कार्यशाला में देशभर के शोधार्थियों ने लिया भाग, जैन साहित्य के व्यवस्थित संरक्षण का लिया संकल्प

ललितपुर।प्रागैतिहासिक क्षेत्र नवागढ़ में संग्रहित दुर्लभ एवं अनुपलब्ध जैन ग्रंथों के संरक्षण हेतु “जिनवाणी संरक्षण एवं प्रबंधन समिति, सागर” के तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय कार्यशाला का गरिमामय आयोजन प्रतिष्ठा पितामह पंडित गुलाबचंद पुष्प पुस्तकालय में सम्पन्न हुआ।
क्षेत्र कमेटी नवागढ़ के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील जैन संचय ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला का संयोजन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. संजीव सराफ के निर्देशन में किया गया।
इस कार्यशाला में पुस्तकालय विज्ञान के अनुभवी अधिकारी, पीएच.डी., एम.लिब. तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए जिनवाणी संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समिति के निदेशक पवन जैन निलेश जैन , कृति जैन (ग्वालियर), रागिनी जैन (विदिशा), डॉ. सुनील जैन (विदिशा), रुचि जैन (गुलाबगंज), आयुषी जैन (एमपीपीएससी चयनित लाइब्रेरियन), प्रशांत जैन (टीकमगढ़), अभिषेक जैन (तालबेहट), शुभी जैन, आयुषी जैन (सागर), पारस जैन (सागर), निकिता जैन, खुशी जैन (लखनऊ), पारूल चौधरी, प्रीति जैन, सृष्टि जैन, लघिमा सागर, अमित जैन (छतरपुर) तथा राष्ट्रीय संयोजक समीर जैन सहित अनेक प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने नवागढ़ में संरक्षित जैन साहित्य—इतिहास, ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म, प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग, द्रव्यानुयोग एवं प्रतिष्ठा से संबंधित ग्रंथों—का सुव्यवस्थित वर्गीकरण एवं नामांकन प्रारंभ किया। साथ ही जैनेंद्र सिद्धांत कोश एवं आचार्य विद्यासागर, आचार्य विशुद्धसागर, आचार्य विनिश्चयसागर, आचार्य विनम्रसागर, आचार्य विशदसागर, मुनि श्री प्रमाणसागर, मुनि क्षमासागर, मुनि सुप्रभसागर, आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका ज्ञानमती माताजी एवं ब्रह्मचारिणी कौशल माताजी के साहित्य को व्यवस्थित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया गया।
डॉ. संजीव सराफ ने नवागढ़ की प्राचीन धरोहर की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ संरक्षित सामग्री अन्यत्र दुर्लभ है। विशाल शैलाश्रयों के मध्य स्थित साधना स्थली, लगभग 8000 वर्ष प्राचीन शैलचित्र, गुप्तकालीन उत्कीर्ण कलाकृतियाँ, काष्ठ निर्मित मानस्तंभ, प्राचीन वेदियाँ, मंदिर संरचनाएँ तथा उत्खनन से प्राप्त पाषाणकालीन उपकरण नवागढ़ की गौरवशाली परंपरा को दर्शाते हैं। सातवीं शताब्दी की प्रतिमाएँ एवं विलक्षण मानस्तंभ यहाँ के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को मनोकामना पूर्ण अतिशयकारी श्री अरनाथ भगवान के अभिषेक, पूजन एवं मंगल आरती का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सभी ने पूजा-विधान सम्पन्न कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस कार्यशाला के माध्यम से जिनवाणी संरक्षण का संगठित एवं वैज्ञानिक कार्य प्रारंभ हुआ है, जो भविष्य में डिजिटल एवं क्लासीफाइड कंप्यूटराइज्ड प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत, महामंत्री वीरचंद्र जैन, प्रवीण जैन, ब्र. संध्या दीदी, अनुराग जैन एवं गुरुकुलम के विद्यार्थियों ने सभी अतिथियों एवं शोधार्थियों का भावभीना स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पुनः नवागढ़ आकर जिनवाणी संरक्षण के कार्य को आगे बढ़ाने तथा आवश्यकता पड़ने पर अपनी सेवाएँ प्रदान करने का संकल्प लिया।
▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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