आलापुर में मृदा परीक्षण पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम

ललितपुर : बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर द्वारा केंद्राध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मुकेश चंद के नेतृत्व में विकासखंड बिरधा के ग्राम आलापुर में मृदा परीक्षण क्यों, कब और कैसे विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डॉ दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान ने मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी में बताया कि पौधों की वृद्धि और विकास के लिए कुल आवश्यक 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। मृदा में फसल के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों की कमी या अधिकता का पता फसल बुवाई से पूर्व मृदा परीक्षण से ही ज्ञात हो पाता है। मृदा परीक्षण से ही पता चलता है कि भूमि में किन किन पोषक तत्वों की कितनी मात्रा में कमी है और आगामी बोई जाने वाली फसल को कितनी मात्रा में और कौन सा उर्वरक दिया जाना है। विशेषकर जब उर्वरकों के मूल्य बहुत बढ़ गये हैं और साथ ही साथ कभी कभी उर्वरकों की कमी का भी सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कृषक बंधु मिट्टी की जांच कराकर रिपोर्ट की संस्तुतियों के आधार पर ही खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें तभी वे प्रति इकाई लागत कम करके अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सही ढंग से नमूना लेना मृदा परीक्षण के लिए नितांत आवश्यक है। खेत के प्रत्येक सामान भाग से अगर या खुरपी से आठ से 10 स्थानों से ऊपरी सतह से लेकर 6 इंच गहराई तक की करीब आधा आधा किलोग्राम मिट्टी समान रूप से निकाल कर इकट्ठी कर लिया जाता है। फिर उसके चार भाग करके किन्हीं दो भागों की मिट्टी हटा दे और शेष दो भागों की मिट्टी पुनः अच्छी तरह मिलाया जाता है। यह क्रिया तब तक दोहराते है जब तक कि आधा किलोग्राम मिट्टी न रह जाये, यही शेष मिट्टी खेत विशेष की मिट्टी परीक्षण का ही प्रतिनिधित्व नमूना होता है। मिट्टी के नमूने को एक कपड़े की साफ थैली में भर लिया जाता है। थैली के अंदर एक सूचना पत्र जिस पर नमूने एवं फसली का पूर्ण विवरण लिखा हो, डाल देते हैं तथा इक बाहर भी बांध देते हैं। मिट्टी का नमूना फसल बुवाई से एक माह पूर्व मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में पहुंचा देना चाहिए, जिससे मृदा जांच के परिणाम समय से कृषक बंधु के पास पहुंच सके। खरीफ फसल हेतु मृदा नमूने मई जून में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में अवश्य भेज दें।
केंद्राध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मुकेश चंद ने सभी कृषक बंधु को मृदा परीक्षण कराने के लिए एक अभियान के रूप अपनाने के लिए प्रेरित किया। मृदा परीक्षण उपरांत प्राप्त संस्तुत के आधार पर संतुलित पोषक तत्वों का प्रबंधन उचित खाद और उर्वरकों के प्रयोग से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर आय में बढ़ोत्तरी किया जा सकता है। कृषि से संबंधित वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में श्री सुरेश प्रकाश कोंटे और श्री महेन्द्र प्रताप सिंह बुंदेला जी ने भी मृदा परीक्षण अपनाने के लिए कृषक बंधु को प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुन्ना राजा, श्री पुष्पेंद्र, श्री गंगा राम, श्री हरभजन सहित 30 कृषक और कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️चीफ एडिटर टाइम्स नाउ बुन्देलखण्ड
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